छठ क्या है और यह कब मनाया जाता है?

छठ पूजा मुख्य रूप से भगवान सूर्य (Surya) और उनकी बहन छठी मइया को समर्पित एक वैदिक महापर्व है। यह साल में दो बार मनाया जाता है:
कार्तिक छठ: दीपावली के 6 दिन बाद (यह सबसे मुख्य होता है)।
चैती छठ: चैत्र नवरात्रि के समय।
यह पर्व 4 दिनों तक चलता है और इसमें पूरी तरह से शुद्धता, अनुशासन और प्रकृति की पूजा की जाती है।
2. यह पर्व क्यों मनाया जाता है? (महत्व)
यह दुनिया का एकमात्र ऐसा त्योहार है जहाँ डूबते हुए सूर्य (अस्तचलगामी सूर्य) को भी अर्घ्य दिया जाता है। इसका संदेश है कि जीवन में अगर ढलना तय है, तो कल फिर से उदय होना भी निश्चित है।
संतान के लिए: महिलाएँ और पुरुष अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए यह कठिन व्रत रखते हैं।
प्रकृति के प्रति आभार: सूर्य हमें रोशनी और ऊर्जा देते हैं, जिससे धरती पर जीवन संभव है। यह उनके प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका है।
3. किसने शुरू किया था? (पौराणिक कथाएँ)
छठ की शुरुआत को लेकर कई प्राचीन कथाएँ प्रचलित हैं:
द्रौपदी और पांडव: कहा जाता है कि वनवास के दौरान द्रौपदी ने अपना राजपाठ वापस पाने के लिए धौम्य ऋषि की सलाह पर यह व्रत किया था।
माता सीता: रावण वध के बाद ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए माता सीता ने मुंगेर (बिहार) में गंगा किनारे सूर्य उपासना की थी।
कर्ण की कथा: माना जाता है कि अंग देश (वर्तमान भागलपुर, बिहार) के राजा कर्ण, जो सूर्य पुत्र थे, उन्होंने ही सबसे पहले सूर्य की उपासना शुरू की थी। वे घंटों पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे।
4. छठ के चार दिन: प्रक्रिया. दिन नाम क्या होता है?
पहला दिन नहाय-खाय घर की सफाई होती है। व्रती शुद्ध शाकाहारी भोजन (कद्दू-भात और चने की दाल) ग्रहण करते हैं।
दूसरा दिन खरना पूरे दिन निर्जला उपवास रहता है। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर और रोटी बनाई जाती है, जिसे खाकर 36 घंटे का कठिन व्रत शुरू होता है।
तीसरा दिन संध्या अर्घ्य बाँस के सूप और टोकरी में फल, ठेकुआ और पकवान सजाकर नदी या तालाब के किनारे जाते हैं और डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
चौथा दिन उषा अर्घ्य उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चा दूध और गुड़ खाकर व्रत खोला जाता है (पारणा)। 
छठ की खास बातें
ठेकुआ: यह इस पर्व का सबसे प्रसिद्ध प्रसाद है, जिसे आटे और गुड़ से बनाया जाता है।
समानता का प्रतीक: इसमें अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता। सब एक ही घाट पर, एक जैसे सूप लेकर खड़े होते हैं।
शुद्धता: इसमें लहसुन-प्याज का सेवन वर्जित होता है और सफाई का इतना ध्यान रखा जाता है कि गलती से भी कोई जूठा हाथ न लगे।
लोकगीत: शारदा सिन्हा जैसे कलाकारों के छठ गीत इस पर्व की रौनक बढ़ा देते हैं।

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