नीतीश कुमार का 'Exit' और नया रोल
बिहार की राजनीति में सबसे बड़ी खबर यह है कि नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद छोड़कर केंद्र की राजनीति में जा रहे हैं।
उन्होंने राज्यसभा चुनाव (मार्च 2026) के लिए नामांकन भरा है।
यह बिहार में 'नीतीश युग' के अंत और एक नए अध्याय की शुरुआत है। उनके बेटे निशांत कुमार भी अब सक्रिय राजनीति में कदम रख चुके हैं और उन्हें JDU में बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है।
2. सत्ता का नया समीकरण (NDA 2.0)
2025 के चुनाव में NDA ने 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है।
BJP का दबदबा: 89 सीटों के साथ बीजेपी अब बिहार में सबसे बड़ी ताकत है। सरकार में सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा जैसे नेताओं का एटीट्यूड काफी आक्रामक है।
नया मुख्यमंत्री: नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद, बिहार को बीजेपी से नया मुख्यमंत्री मिलने की चर्चा जोरों पर है। कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी किसी 'पिछड़ा' या 'अति पिछड़ा' चेहरे को मुख्यमंत्री बनाकर मास्टरस्ट्रोक खेल सकती है।
3. विपक्ष (RJD) का 'Backfoot' मोड
तेजस्वी यादव के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है। 2025 के चुनाव में RJD केवल 25 सीटों पर सिमट गई है।
विपक्ष फिलहाल सदन में कमजोर है, लेकिन तेजस्वी यादव जनता के बीच जाकर अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए नई रणनीति बना रहे हैं।
4. 2026 के मुख्य मुद्दे और 'एटीट्यूड'
Power & Development: अब बिहार की राजनीति 'जाति' से ज्यादा 'पावर' और 'इंफ्रास्ट्रक्चर' की ओर झुक रही है। नए एक्सप्रेसवे, पुलों और इंडस्ट्री लाने के वादों पर ज्यादा शोर है।
सोशल मीडिया का दबदबा: अब राजनीति रैलियों से ज्यादा Facebook, Instagram और YouTube के जरिए लड़ी जा रही है। नेताओं के बीच डिजिटल "Rangdari" (Vibe) और क्रेडिबिलिटी दिखाने की होड़ है।
प्रशांत किशोर (Jan Suraaj): प्रशांत किशोर की पार्टी भले ही विधानसभा में कम सीटें लाई हो, लेकिन वह जमीनी स्तर पर युवाओं को जोड़कर 2026 के स्थानीय चुनावों (नगर निगम/पंचायत) के लिए अपना 'अलग एटीट्यूड' दिखा रहे हैं।Instagram link
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